कहां कहां से इकट्ठा करूँ तुझे-ए-.. जिंदगी"
जहाँ भी देखता हूं तू बस बिखरी हुई ही नज़र आती हैं..!mk____raja__72
जिम्मेदारियां बढ़ने पर ना
आदमी रो सकता है ना सो सकता है..!open link
अकेले में बैठा मेरा मन अब "ईश्क" का नहीं
कामयाबी का ख़्वाब देखता है..! Open
संघर्ष की रात जितनी ज्यादा अधेरी होती है
सफलता का सूरज उतना ही तेज चमकता है

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